प्रदर्शनी का इतिहास एवं परिचय

प्रदर्शनी का इतिहास एवं परिचय

यह प्रदर्शनी का आरम्भ वर्ष 1880 में राज हरनरायन सिंह की प्रेरणा से – अलीगढ़ डिस्ट्रिक्ट फेयर के नाम से अश्व प्रदर्शनी के रूप में तत्कालीन कलेक्टर श्री मार्शल द्वारा किया था। इस प्रदर्शनी मैदान में तत्कालीन कलेक्टर दरबार लगाकर जिले के हर महकमों से सम्बन्धित समस्याओं का समाधान करते थे तथा विभागीय सामंजस्य के लिए अपने मातहतों का मार्ग दर्शन करते थें। सन् 1914 के तत्कालीन कलेक्टर श्री डब्लू एस मैरिस जिनके नाम से अलीगढ़ में मैरिस रोड प्रसिद्ध है उन्हीं के द्वारा दरबार हाल बनवाया गया। वह प्रदर्शनी साल में एक बार ही लगा करती थी, जिसमें तीन दरबार लगा करते थे, जिसका स्वरूप अब परिवर्तित होकर उद्घाटनमहोत्सव तथा समापन समारोह हो गया है।
स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व इस अश्व प्रदर्शनी और सामान्य दरबार के अलावा गर्मियों व सर्दीयों में सालाना दरबार लगते थे। धीरे-धीरे इन दरबारों का स्वरूप व्यापक होता गया, यहॉं सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेल तमाशें भी होने लगे तथा बड़े व्यापारी, कुशल सफल धनी होने व ग्रामीण ज़मीदार सम्मलित होने लगे। इस अवसर पर मेल-जोल बढाने के लिए रईस लोग अफसरों को शानदार घोड़े दिखाते थे, घुड़सवारी का शौक पुरा कराते थे। इस जमावड़े के लिए हलवाई खास तौर पर बुलाये जाते थे, जो पकवान तैयार करते थे।

इस प्रदर्शनी को भव्य रूप प्रदान किये जाने में समय-समय पर जिले में तैनात तत्कालीन कलैक्टरों द्वारा वर्ष 1914 से लेकर वर्ष 2008 तक श्री डब्ल्यू एस मैरिस, श्री गोबिन्द नरायन, श्री के०सी० मित्तल, श्री दिलीप कुमार भट्टाचार्य, श्री सोमनाथ पंण्डिता, श्री एस०डी० बागला, श्री संतोष यादव, श्री भुवनेश कुमार, आदि अधिकारियों द्वारा इस प्रदर्शनी में विभिन्न कार्य कराये गयें, जिसमें मुख्य रूप से दरबार हॉल का निर्माण, प्रदर्शनी का मुख्य द्वार मित्तल गेट, प्रदर्शनी का मुख्य चौराहे पर राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी की प्रतिमा स्थापित किया जाना कृषि का एवं शिल्प ग्राम बाजार का निर्माण, मुक्ताकाश मंच का निर्माण तथा कृष्णांजलि नाट्यशाला का निर्माण कराया गया।
प्रदर्शनी के भव्यवता को बनाये रखने के दृष्टिगत वर्ष 2011 एवं वर्ष 2013 में प्रदर्शनी स्थित वर्तन बाजार की पुरानी दुकानों का जीर्णय द्वार कराया गया। अलीगढ़ जनपद की जनता के प्यार एवं उनके उच्च कोटि के मनोरंजन के लिए वर्ष 2013 में नीरज-शहरयार पार्क तथा वर्ष 2014 में कोहिनूर मंच का भव्य निर्माण कराया गया।

वर्ष मे एक बार लगने वाली प्रदर्शनी का यह स्वरूप अलीगढ़ मण्डल ही नही वरन् देश के अधिकतर लोगों के व्यापार, विज्ञापन, प्रदर्शनी एवं उच्च कोटि के मनोरंजन का अनुठा केन्द्र बन गया। अलीगढ़ की यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी वास्तव में अब पश्चिमि उ०प्र० के जिलों में अपनी शान की एक मात्र प्रदर्शनी है। जिसे देखने के लिए इस अंचल का पूरा जन मानस उमड़ पड़ता है। इस प्रदर्शनी के जीवनोपयोगी वस्तुओं के अलावा कम्बल, कश्मीरी शॉल, साडि़यॉं, टेलीविजन, साईकिल से लेकर सुई तक उपलब्ध रहती है। प्रदर्शनी के चौपड़नुमा बाजार ग्राहकों को सहज ही आकर्षित करते हैं। यह प्रदर्शनी प्रत्येक दिन तीन रूप धारण करती है। एक स्वरूप वह जब वह पूर्णतया ग्रामीण होती है, दूसरा स्वरूप में वह शहरी तथा तीसरे रूप में वह युवकों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रसिक श्रोताओं के मानोविनोद का स्थल बनती है।
अलीगढ़ जनपद के बन्ना देवी क्षेत्रान्तर्गत स्थित राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी अलीगढ़ लगभग 17.250 हेक्टेयर अर्थात 1,72,500 वर्गमीटर एरिया में सम्पन्न होती है। प्रदर्शनी भूमि का अक्षांस 54 तथा देशांतर 42 है। सन् 1893 ई0 के एक सर्वे के अनुसाार समुद्र तल से इसकी ऊँचाई लगभग 611.867 फीट है। ब्रिटिश काल के दौरान नुमाईश मैदान में सुरक्षा के द़ृष्टिकोण से अंग्रेजी सेना की नवीं रेजीमेंट की चार कंपनियां तैनात की गई थी। कालान्तर में इसी के दरबार हॉल में डेरा-तम्बू लगाकर अपना राजकीय दरबार लगाना शुरू किया था।
भारत क हृदय वस्तुत: गॉंव में है जिनके उन्नयन व उत्कर्ष का कार्य शासन, प्रशासन द्वारा किया जाता है। ऐसे माहौल में दर्शकों को प्रत्येक उस विभाग एवं विषय की समयक जानकारी देना अपरिहार्य है, जिसका वास्ता उनसे पड़ता है, प्रदर्शनी का कृषि एवं विकास कक्ष, प्रदर्शनी प्रशासन का ऐसा विनम्र प्रयास है जिसके माध्यम से एक ऐसी मौलिक उपयोगी कोशिश निरन्तर की जा रही है, जिससे दर्शकों को विकास सम्बन्ध सारी सूचनाएं उपलत्ब्ध हों तथा प्रत्येक विभाग व उसके कार्यकलाप दर्शकों की जानकारी में आये बिना न रहें।
प्रदर्शनी में उद्योग कक्ष भी बड़ा उपयोगी सिद्ध हुआ है, जिसमें जिले में उत्पादित विभिन्न उत्कृष्ट वस्तुओं को सुपरिचित निर्माताओं द्वारा अपने-अपने प्रदर्शन एव विक्रय केन्द्र स्थापित किये जाते हैं जिनसे दर्शक लाभ उठाते हैं।
अलीगढ़ की संस्कृति में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का जिक्र न हो तो अलीगढ़ जिला अधूरा ही है। अलीगढ़ जनपद की संस्कृति में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का प्रमुख स्थान है जिसका प्रभाव अलीगढ़ की प्रदर्शनी पर प्रत्यक्ष दिखाई देता है। इस प्रदर्शनी में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा भी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी संपादित किये जाते हैं।
अलीगढ़ की प्रदर्शनी जनपद का ही नही वरन् सम्पूर्ण देश का प्रतिनिधित्व करती है तथा कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्रत्येक धर्म एवं सम्प्रदाय के देशवासी इसमें शामिल होकर भारतक के विविधतओं में एकता की छवि को गौरवान्वित करते हैं। इसकी ख्याति देश व्यापि है, इसी कारण प्रदेश के विभिन्न नगरों से ही नही वरन् देश के सभी प्रांतों यथा-जम्मू, कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक आदि के व्यावसायिक प्रतिष्ठित दुकानदार, खेल तमाशे वाले प्रदर्शन की श्रीबृद्धि करते हैं।